दिल्ली में एक बड़ा बच्चों की तस्करी नेटवर्क पकड़ा गया, जो गरीब परिवारों के बच्चों को खरीदकर अमीर परिवारों को बेचता था। यह गैंग केवल बच्चों को बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें घरों में काम करने (डोमेस्टिक लेबर) और अवैध गतिविधियों में भी इस्तेमाल करता था।
🔹 गैंग की जानकारी
मुख्य आरोपी: सरोज (40 वर्ष) – अभी फरार
गिरफ्तार सदस्य: यास्मिन, अंजलि और जितेन्द्र
काम करने का तरीका:
गुजरात और राजस्थान के गरीब परिवारों से बच्चों को दिल्ली लाया जाता था।
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए बच्चों को अमीर परिवारों को बेचा जाता था।
बच्चों को घरेलू काम करने के लिए भी रखा जाता था।
🔹 पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने 8 अप्रैल 2025 को उत्तम नगर में स्टिंग ऑपरेशन किया और गैंग के तीन सदस्य गिरफ्तार किए।
बच्चों को उनके असली परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया गया।
गिरफ़्तार सदस्यों से पूछताछ में पता चला कि गैंग के निर्देश सरोज देती थी।
🔹 कानूनी पहल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष टीम बनाने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है और इसे तुरंत तोड़ना आवश्यक है।
🔹 निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि गरीब परिवारों के बच्चों को कैसे फंसाया जाता है और उनका इस्तेमाल अवैध तरीकों से किया जाता है।
पुलिस और न्यायालय की कड़ी कार्रवाई से ही बच्चों को बचाया जा सकता है और अपराधियों को सजा दी जा सकती है।


