✍️ By Editor-in-Chief: Abhijit Sharma
जब देश जल प्रलय से जूझ रहा था… कुछ व्यस्त थे जश्न में
नeta से लेकर मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक — सभी आज Narendra Modi का जन्मदिन मनाने में मशरूफ दिखे। इस मौके पर Kangana Ranaut जैसी सांसदों ने तो यहां तक कह दिया कि “Modi is the real son of Mother India”।
ज़ाहिर है, किसी जननायक का सम्मान करना कोई गुनाह नहीं, लेकिन इस बयान को किस हद तक गले से उतारा जा सकता है — जब पूरा देश जल प्रलय की विनाशकारी मार झेल रहा हो?
उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक, प्रकृति ने इस समय अपना कहर बरपा रखा है। हमने देखा कि लोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। कहीं बच्चों के घर बह गए, तो कहीं बहते पानी में छोटे बच्चों को तक नहीं पता कि जो लाश बह रही है, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।
मैं पत्रकार हूं। मैंने वो भयावह मंजर अपनी आंखों से देखे हैं — टूटी-फूटी ज़िंदगियां, बिखरे सपने, और आंखों में तैरते सिर्फ सवाल कि अब आगे कैसे जिया जाएगा।
लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने ‘हीरो’ का जन्मदिन मनाने में इस कदर मशगूल हैं कि आम लोगों के दर्द, उनकी तकलीफें और उनके आंसुओं तक को भुला बैठे हैं।
Hero — मेरे लिए तो असली वो हैं…
जो दिन-रात एक करके, अपनी जान की बाज़ी लगाकर भी लोगों की जान बचाने में जुटे हैं।
फिर चाहे वो NDRF के जांबाज़ जवान हों, SDRF, Indian Army के सैनिक या Indian Police के वीर जवान।
15-16 सितंबर की रात जब उत्तर भारत में जल प्रलय ने कहर ढाया, तब इन्हीं नायकों ने तेज़ बहाव में फंसे लोगों की ज़िंदगियां बचाईं। एक दृश्य आज भी आंखों में ताज़ा है — जब बहाव के बीच बिजली के खंभे से चिपका एक व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था… और NDRF के बहादुर जवान अपनी जान जोखिम में डालकर उस तक पहुंचे, उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
पेश है वो एक्सक्लूसिव वीडियो — जो दिखाता है कि असली हीरो किसे कहते हैं।
ये हैं मेरे असली हीरो।
इन हीरोज़ को मेरा सलाम। 🇮🇳
— Abhijit Sharma
Editor-in-Chief


